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हनीफ टेन्शन देने का लेने का नही… “सो गया येह जहाँ, सो गया आसमान “

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भाग 2 |

हनीफ टेन्शन देने का लेने का नही…

“सो गया येह जहाँ, सो गया आसमान “

लकी भाई क्यू परस रहे हो जहर….

सुंगधित तंबाखू का गोरखधंधा..

 

नागभीड – लकी भाई क्यू परस रहे हो जहर!जहाँ कॅन्सर होना तय है. तो हा लकी भाई का तो कारोबार ही अब जहर सा बन गया है. पिछले 15 सालो से अपना शिक्का जमाये बैठे लकी भाई सुंगधित तंभाखू के इलाके के बादशाह बने हुये. उनके उपर आखिर किस किस आला अधिकारायीको का आशीर्वाद है येह पता लगणे वाला है. लकी भाई आधे से *जाधा*काम तो वडसा से ही निपटा लेते है. उनकी बडी गाडिया वडसा मे खाली होकर फिर ब्रम्हपुरी, नागभीड, सिंदेवाही, तळोधी बाळापूर, और 100से अधिक ग्रामीण इलाको मे खुलेआम सुंगधित तंभाखू का सप्लाय करते है.करोना के काल मे लकी भाई धडल्ले से छत्तीसगड से करोडो रुपयोका का सुंगधित तंभाखू ठिकाणे लगाये हुये है.इतना बडा व्यापार होने के बावजुद आखिर पुलिस, अन्न औषध प्रशासन को आखिर सही मे इस जहरीले व्यापार की भनक ना हो येह बात हजम होने लायक नही है.

सूत्रो की माने तो पहले सुंगधित तंभाखू के धंधे को लेकर कही सारे मोहरे दिखाई दिये लेकिन रुपयो के वजन के साथ लकी भाई ने पुरे इलाको मे कब्जा जमा लिया. व्यापार का जाल इतना बडा हुवा की अब लकी भाई सिर्फ फोन पर ही मुहय्या होते है. व्यापार के लिये ग्रामीण इलाको के लडको की एक टीम लकी ने बनायी रखी है. कुछ दिनो पूर्व लकी का एक सुंगधित तंभाखू का ट्रक भी लुटा गया था. लकी के नाम से प्रसिद्ध इस गोरख धंधे का मुखीया का नाम कुछ खास है .

राज्य सरकार सुंगधित तंभाखू के खिलाफ कितने अभियान चला रहा है फिर भी हमारी प्रशासन व्यवस्था सोयी हुवी नजर आ रही है. कॅन्सर से कही लोगी की जिंदगीया बरबाद हो गयी है इसके बावजुद आखिर क्यू कारवाई नही हो रही येह समज के बाहर है. सूत्रो से पता चलता है की रुपयो का वजन इतना है की कारवाई की जबान पर आला अधिकारीयोके मुह से आवाज नही निकलती. बात तो ऐसी हो गयी है ‘हनीफ टेन्शन देने का लेने का नही ‘… कारोबार शुरु रखा जाये बस इतनाही कागज पर आला अधिकारीयोको लिखना देना बाकी रहा गया है?

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